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Happy Dussehra Essay In Hindi

दशहरा / विजयदशमी 2017 : दशहरा या विजयदशमी पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता और साहस का पूजक, शौर्य का उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में जोश और वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। यह त्योहार अशिवन महीने के शुक्ल पक्ष में दस दिनों तक मनाया जाता है । इन दिनों माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है । त्योहार का अंतिम दिन विजयादशमी के रूप में मनाया जाता है । असत्य पर सत्य की जीत इस त्योहार का मुख्य संदेश है ।

दशहरा / विजयदशमी पर निबंध Dussehra Nibandh in Hindi

नमस्कार दोस्तों ! दशहरा या विजयदशमी का त्योंहार आश्विन शुक्ल दशमी को मनाया जाता हैं | दशहरा का त्योंहार वीरता और शोर्य का प्रतीक हैं | विजयदशमी का त्योंहार एक ऐसा दिन हैं जिस दिन अच्छाई की जीत और बुराई की हार होती हैं | दशहरा का उत्सव दस दिनों तक चलता हैं | दस दिनों के इस त्योंहार में माँ दुर्गा के नों रूपों की पूजा की जाती हैं | दुर्गाष्ठ्मी के दिन नवरात्रा पुरे होते हैं और माँ दुर्गा की पूजा कर कंवारी कन्याओ को भोजन करवाया जाता हैं और महानवमी का उत्सव मनाया जाता हैं | नवरात्रा के शुरू होते ही दशहरा उत्सव भी चालू हो जाता हैं | कहा जाता हैं की रावण ने सीता का हरण किया था तो राम को सीता को लाने में दस दिनों का समय लगा था | दसवे दिन श्री राम ने रावण के दसों शीश काट कर महान पापी रावण का अंत किया था और माता सीता को रावण के चंगुल से आजाद किया था |उसी ख़ुशी में विजयदशमी का उत्सव मनाया जाता हैं |

दशहरा / नवरात्रा में माँ दुर्गा शक्ति की पूजा

दशहरा भक्ति और समर्पण का त्योहार है । भक्त भक्ति- भाव से दुर्गा माता की आराधना करते हैं । नवरात्र में दुर्गा के नौ विभिन्न रूपों की पूजा होती है । दुर्गा ही आवश्यकता के अनुसार काली, शैलपुत्री, ब्रह्‌मचारिणी ,कुष्मांडा आदि विभिन्न रूप धारण करती हैं और आसुरी शक्तियों का संहार करती हैं । वे आदि शक्ति हैं । वे ही शिव पत्नी पार्वती हैं । संसार उन्हें पूजकर अपने अंदर की आसुरी शक्ति को नष्ट होने की आकांक्षा रखता है । दुर्गा रूप जय यश देती हैं तथा द्वेष समाप्त करती हैं । वे मनुष्य को धन- धान्य से संपन्न कर देती हैं ।

विजयादशमी के त्योंहार पर रामलीला का आयोजन

भारत के कई हिस्सों में रामलीला का मंचन होता है । कहा जाता है कि विजयादशमी के दिन भगवान राम ने लंकेश अहंकारी रावण का वध किया था । रावण अत्याचारी और घमंडी राजा था । उसने राम की पत्नी सीता का छल से अपहरण कर लिया था । सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने के लिए राम ने वानरराज सुग्रीव से मैत्री की । वे वानरी सेना के साथ समुद्र पार करके लंका गए और रावण पर चढाई कर दी । भयंकर युद्ध हुआ । इस युद्ध में मेघनाद, कुंभकर्ण, रावण आदि सभी वीर योद्धा मारे गए । राम ने अपने शरण आए रावण के भाई विभीषण को लंका का राजा बना दिया और पत्नी सीता को लेकर अयोध्या की ओर प्रस्थान किया । रामलीला में इन घटनाओं का विस्तृत दृश्य दिखाया जाता है । इसके द्वारा श्रीराम का मर्यादा पुरुषोत्तम रूप उजागर होता है ।29 सितंबर को नवरात्रि का आखिर दिन होगा और इसके बाद 30 सितंबर को देश में दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भगवान राम ने रावण को युद्ध में हराकर उसका वध किया था और लंका पर विजय प्राप्त की थी, इसी कारण से इस दिन विजयादशमी का पर्व मनाया जाता है। दशहरे के दिन पूरे देश में भगवान राम की पूजा की जाती है और प्रतीक के रूप में रावण का पुतला जलाया जाता है, लेकिन देश में ऐसी कई जगह है जहां पर दशहरे के दिन राम की नहीं बल्कि रावण की पूजा होती है। आइए जानते हैं आखिर क्यों की जाती है इन स्थानों पर रावण की पूजा ?

वो स्थान जहाँ होती हैं रावण की पूजा

भारत के कई एसे स्थान हैं जहाँ राम की नहीं रावण की पूजा की जाती हैं आज भी वहां रावण के भक्त हैं जो रावण की पूजा बड़े ही श्रधा भाव से करते हैं | देखिये वो कोंसी जगह हैं ?

१. मंदसौर

मध्यप्रदेश के मंदसौर स्थान पर रावण की पूजा की जाती है। मंदसौर का पुराना नाम दशपुर था यहां की रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था इसलिए इस स्थान नाम मंदसौर पड़ा। मंदसौर रावण का ससुराल होने के कारण रावण का यहां दहन नहीं किया जाता बल्कि पूजा की जाती है।

२. बिसरख, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के बिसरख नामक गांव में रावण की पूजा की जाती है। यह गांव रावण का ननिहाल माना जाता है। रावण के पिता विश्वेशरा के कारण इसका नाम बिसरख पड़ा।

३. जसवंतनगर, उत्तर प्रदेश

प्रदेश के जसवंतनगर में दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। उसके बाद रावण के टुकड़े कर दिए जाते हैं और तेरहवें दिन रावण की तेरहवीं भी की जाती है।

४. अमरावती,महाराष्ट्र

अमरावती के गढ़चिरौली में यहां के आदिवासी लोग दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। ये आदिवासी समुदाय रावण को अपना देवता मानते हैं।

 

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दशहरा एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिन्दू त्यौंहार है जो पूरे भारत के लोगों के द्वारा हर साल बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ये एक धार्मिक और पारंपरिक उत्सव है जिसे हर बच्चों को जानना चाहिये। विद्यार्थियों के ज्ञान और कुशलता को बढ़ाने में स्कूल औऱ कॉलेजों में निबंध लेखन एक सामान्य और असरदार तरीका है। हम यहाँ विद्यार्थियों के लिये दशहरा पर निबंध और कई पैराग्राफ उपलब्ध करा रहे है जिसका प्रयोग विद्यार्थी भविष्य के किसी प्रतियोगिता के लिये कर सकते है।

दशहरा पर निबंध (दशहरा एस्से)

Get here some essays on Dussehra in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

दशहरा पर निबंध 1 (100 शब्द)

दशहरा को लोग विजयदशमी के नाम से भी जानते है, इसे पूरे भारत के लोग जबरजस्त उत्साह और खुशी के साथ मनाते है। ये भारत के प्रमुख धार्मिक त्योहारों में से एक है। ऐतिहासिक मान्यताओं और प्रसिद्ध हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण के अनुसार ऐसा उल्लिखित है कि भगवान राम ने रावण को मारने के लिये देवी चंडी की पूजा की थी। लंका के दस सिर वाले राक्षस राजा रावण ने अपनी बहन शूपर्णंखा की बेइज्जती का बदला लेने के लिये राम की पत्नी माता सीता का हरण कर लिया था। तब से जिस दिन से भगवान राम ने रावण को मारा उसी दिन से दशहरा का उत्सव मनाया जा रहा है।

दशहरा पर निबंध 2 (150 शब्द)

विजयदशमी के नाम से मनाया जाने वाला त्योहार दशहरा, हिन्दू धर्म के द्वारा हर साल पूरे भारत में बेहद खुशी के साथ मनाया जाता है। ये हर साल दिपावली के 20 दिन पहले सितंबर या अक्टूबर के महीने में पड़ता है। ये पर्व राक्षस राजा रावण पर राम के जीत की खुशी में मनाया जाता है। दशहरा का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रुप मनाया जाता है। जिस दिन भगवान राम ने रावण को मारा उसी दिन से दशहरा मनाया जा रहा है। ये प्रथा प्रचीन काल से ही चली आ रही है।

प्राचीन समय में, राजा राम को उनके राज्य अयोध्या से 14 साल के लिये वनवास पर भेज दिया गया था। वनवास के आखिरी सालों में रावण ने सीता का हरण कर लिया। ऐसा कहा जाता है कि राम के भाई लक्ष्मण ने रावण की बहन के नाक-कान काट दिये थे जिस कारण रावण ने लक्ष्मण की भाभी सीता का अपहरण कर लिया। लोग इस पर्व को ढ़ेर सारी खुशी और उत्साह के साथ मनाते है।

दशहरा पर निबंध 3 (200 शब्द)

दशहरा हिन्दुओं का बहुत महत्वपूर्ण और मायने रखने वाला त्यौहार है। इस पर्व का महत्व पारंपरिक और धार्मिक रुप से बहुत ज्यादा है। भारतीय लोग इसे बहुत उत्साह और भरोसे से मनाते है। ये पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत को भी प्रदर्शित करता है अर्थात् पाप पर पुण्य की जीत। लोग इसे कई सारे रीति-रिवाज और पूजा-पाठ के द्वारा मनाते है। धार्मिक लोग और भक्तगढ़ पूरे दिन व्रत रखते है। कुछ लोग इसमें पहले और आखिरी दिन व्रत रखते है तो कुछ देवी दुर्गा का आशीर्वाद और शक्ति पाने के लिये इसमें पूरे नौ दिन तक व्रत रखते है। दसवेँ दिन लोग असुर राजा रावण पर राम की जीत के उपलक्ष्य में दशहरा मनाते है। दशहरा का पर्व हर साल सितंबर और अक्टूबर के अंत में दिवाली के दो सप्ताह पहले आता है।

देश के कई हिस्सों में दशहरा को मनाने का रीति-रिवाज और परंपरा अलग-अलग है। कई स्थानों पर इसे पूरे दस दिनों के लिये मनाया जाता है, मंदिर के पुजारियों द्वारा मंत्र और रामायण की कहानियाँ भक्तों की बड़ी भीड़ के सामने सुनायी जाती है साथ ही कई जगहों पर राम लीला का आयोजन 7 दिनों या महीनों तक किया जाता है।


 

दशहरा पर निबंध 4 (250 शब्द)

दशहरा हिन्दू धर्म के लोगों का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। इसे पूरे उत्साह के साथ पूरे देश में हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा लगातार दस दिन तक मनाया जाता है। पहले नौ दिन तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है इसीलिये इसे दशहरा कहते है। दसवें दिन लोग असुर राजा रावण का पुतला जला कर मनाते है। दशहरा का ये पर्व सितंबर और अक्टूबर के महीने में दिवाली के दो या तीन हफ्ते पहले पड़ता है। हिन्दू देवी दुर्गा की पूजा के द्वारा इस त्यौहार को मनाया जाता है तथा इसमें प्रभु राम और देवी दुर्गा के भक्त पहले या आखिरी दिन या फिर पूरे नौ दिन तक पूजा-पाठ या व्रत रखते है। नवरात्र को दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है जब देवी दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है।

दशहरा या विजयदशमी के अवसर पर राम लीला या बड़े मेले के आयोजन के द्वारा के लोग दसवाँ दिन मनाते है जहाँ भगवान राम के नाटकीय मंचन के द्वारा ऐतिहासिक जीवन को दिखाया जाता है। विजयदशमी मनाने के पीछे राम लीला का उत्सव पौराणिक कथाओं को इंगित करता है। ये सीता माता के अपहरण के पूरे इतिहास को बताता है, असुर राजा रावण, उसके पुत्र मेघनाथ और भाई कुम्भकर्ण की हार और अंत तथा राजा राम की जीत को दर्शाता है। वास्तविक लोग राम, लक्ष्मण और सीता तथा हनुमान का किरदार निभाते है वहीं रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण का पुतला बनाया जाता है। अंत में बुराई पर अच्छाई की जीत को दिखाने के लिये रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के पुतले जला दिये जाते है और पटाखों के बीच इस उत्सव को और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दशहरा पर निबंध 5 (300 शब्द)

पूरे देश में मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है दशहरा। ये हर साल सितंबर या अक्टूबर के महीने में दिपावली के पर्व से 20 दिन पहले आता है। लंका के असुर राजा रावण पर भगवान राम की जीत को दिखाता है दशहरा। भगवान राम सच्चाई के प्रतीक है और रावण बुराई की शक्ति का। देवी दुर्गा के पूजा के साथ हिन्दू लोगों के द्वारा ये महान धार्मिक उत्सव और दस्तूर मनाया जाता है। इस पर्व को पूरे देश में मनाने की परंपरा और संस्कार क्षेत्र दर क्षेत्र अलग-अलग है।

ये 10 दिन लंबा उत्सव होता है, जिसमें से नौ दिन देवी दुर्गा की पूजा के लिये और दसवाँ दिन विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है ये असुर राजा रावण पर भगवान राम की जीत के अवसर के रुप में भी मनाया जाता है। इसके आने से पहले ही लोगों द्वारा बड़ी तैयारी शुरु हो जाती है। ये 10 दिनों का या एक महीने का उत्सव या मेले के रुप में होता है जिसमें एक क्षेत्र के लोग दूसरे क्षेत्रों में जाकर दुकान और स्टॉल लगाते है। ये हर समाज या समुदाय के राम-लीला मैदान पर आयोजित होता है जहाँ पूरे 10 दिन तक रामायण के विभिन्न चरित्रों द्वारा प्रस्तुति दी जाती है। राम, सीता और लक्ष्मण के किरदार के लिये वास्तविक कलाकार होते है वहीं रावण, मेघनाथ और कुम्भकर्ण के कागज के पुतले बनाये जाते है।

हर तरफ जगमगाती रोशनी और पटाखों की शोर से गूँजता माहौल। बच्चे और बाकी सभी लोग रामलीला को पूरी रात देखते है। रामलीला मंचन के द्वारा वास्तविक लोग रामायण के पात्रों और उनके इतिहास को बताते है। हजारों की संख्या में आदमी, औरत और बच्चे रामलीला मैदान में अपने पास के क्षेत्रों से इस उत्सव का आनन्द उठाते है।


 

दशहरा पर निबंध 6 (400 शब्द)

दशहरा भारत का एक महत्वपूर्ण और लंबा उत्सव है। पूरे देश में इसे पूरे उत्साह, प्यार, विश्वास और सम्मान के साथ हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा मनाया जाता है। सभी के द्वारा मस्ती करने के लिये ये वाकई अच्छा समय होता है। दशहरा के उत्सव पर स्कूल और कॉलेजों से भी कुछ दिनों की छुट्टी मिल जाती है। ये पर्व हर साल सितंबर और अक्टूबर के महीने में दिवाली के 20 दिन पहले पड़ता है। लोगों को इस त्योंहार का बड़ी बेसब्री से इंतजार रहता है।

भारत एक ऐसा देश है जो अपनी परंपरा और संस्कृति, मेले और उत्सव के लिये जाना जाता है। यहाँ हर पर्व को लोग पूरे जोशों-खरोश और खुशी के साथ मनाते है। हिन्दू पर्व को महत्व देने के साथ ही इस त्योंहार को पूरी खुशी के साथ मनाने के लिये भारत की सरकार द्वारा दशहरा के इस उत्सव पर राजपत्रित अवकाश की घोषणा की जाती है। दशहरा का अर्थ है ‘बुराई के राजा रावण पर अच्छाई के राजा राम की जीत’। दशहरा का वास्तविक अर्थ दस सर वाले असुर का इस पर्व के दसवें दिन पर अंत है। पूरे देश में सभी लोगों द्वारा रावण को जलाने के साथ ही इस उत्सव का दसवाँ दिन मनाया जाता है।

देश के कई क्षेत्रों में लोगों के रीति-रिवाज और परंपरा के अनुसार इस उत्सव को लेकर कई सारी कहानियाँ है। इस उत्सव की शुरुआत हिन्दू लोगों के द्वारा उस दिन से हुई जब भगवान राम ने असुर राजा रावण को दशहरा के दिन मार दिया था (हिन्दू कैलेंडर के अश्वयुजा महीने में)। भगवान राम ने रावण को इसलिये मारा क्योंकि उसने माता सीता का हरण कर लिया था और वापस करने के लिये तैयार नहीं था। इसके बाद भगवान राम ने हनुमान की वानर सेना और लक्ष्मण के साथ मिलकर रावण को परास्त किया।

हिन्दू धर्मग्रंथ रामायण के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि देवी दुर्गा को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिये राजा राम ने चंडी होम कराया था। इसके अनुसार युद्ध के दसवें दिन रावण को मारने का राज जान कर उस पर विजय प्राप्त कर लिया था। अंतत: रावण को मारने के बाद राम ने सीता को वापस पाया। दशहरा को दुर्गोत्सव भी कहा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि उसी दसवें दिन माता दुर्गा ने भी महिषासुर नामक असुर का वध किया था। हर क्षेत्र के रामलीला मैदान में एक बहुत बड़ा मेला आयोजित किया जाता है जहाँ दूसरे क्षेत्र के लोग इस मेले के साथ ही रामलीला का नाटकीय मंचन देखने आते है।

 

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